10 March 2020

गुलामी के आठ लक्षण: क्या हम मानसिक गुलाम बन चुके हैं?



✍🏼 नितेश शुक्ला

आज के दौर में मानसिक गुलामी समाज के विकास में एक बड़ा रोड़ा साबित हो रही है। दिमागी गुलामी इसलिए ख़तरनाक है क्योंकि मानसिक रूप से गुलाम व्यक्तियों का इस्तेमाल धर्मगुरुओं से लेकर राजनेताओं, विज्ञापन कंपनियों, उत्पाद विक्रेताओं द्वारा आसानी से किया जा सकता है। ऐसे लोगों से फिर अपने मन मुताबिक कार्य करवाया जा सकता है। साथ ही मानसिक रूप से गुलाम व्यक्ति सामाजिक बदलाव के पहिए को पीछे की ओर मोड़ने की कोशिश करने लगते हैं। वे अपनी मानसिक जड़ता से ही चिपक जाते हैं और सामाजिक परिवर्तन के ख़याल मात्र से घबरा जाते हैं।
ऐसा नहीं है कि यह कोई नई चीज है। हमारे कई पूर्वजों जैसे महात्मा बुद्ध, राधा मोहन गोकुल,  शहीद भगतसिंह, पेरियार, डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर, महापंडित राहुल सांकृत्यायन आदि ने लोगों की मानसिक जड़ता और गुलामी पर लिखा और उसको दूर करने की दिशा में काम किया। उन्होंने भारत के लोगों से  मानसिक बेड़ियों को तोड़कर फेंक देने का भी आह्वान किया। उनके विचारों का अगर संक्षिप्त में सार निकाला जाए तो निम्नलिखित बातें सामने आती हैं जो किसी व्यक्ति के मानसिक गुलाम होने का संकेत देती हैं- 

गुलामी के आठ लक्षण:

1. किसी की कही गयी बात को परखे बिना उसपर आँख मूंद कर भरोसा कर लेना दिमागी गुलामी है।

2. ज्ञान का आधार तर्क को न समझना बल्कि किसी बात को बस इसलिए सही मान लेना क्योंकि उसे किसी बड़े व्यक्ति, पूर्वज, नेता या किताब ने कहा है, ये उससे भी बड़ी गुलामी है। 

3. अपने प्रिय नेता/अभिनेता/पार्टी के गलत कामों पर भी सफाई देते रहना, उसका पक्ष लेते रहना, ये तीसरी सबसे बड़ी गुलामी है।

4. कुरीतियों या परम्पराओं का बस इसलिए पालन करते रहना क्योंकि हमारे पूर्वज भी ऐसा करते थे, ये चौथी सबसे बड़ी गुलामी है। 

5. जीवन में पूरे समाज के कल्याण की दिशा में काम करने की बजाय भौतिक वस्तुओं की लालसा में ज़िंदगी गुजार देना पाँचवीं सबसे बड़ी गुलामी है।

6. खुद को अन्य जाति/धर्म/समुदाय के लोगों से श्रेष्ठ समझना और दूसरों को नीचा समझना, ये छठवीं तरह की गुलामी है।

7.  किसी समुदाय के एक व्यक्ति के गलती करने पर उस पूरे समुदाय को गलत ठहरा देना, उससे नफरत करने लगना, ये सातवें तरह की दिमागी गुलामी है। 

8. बहस में तर्क से हारने पर कुतर्क पर उतर आना और अपनी बात पर अड़ जाना आठवीं सबसे बड़ी गुलामी है।

कहा भी गया है- अपने समाज, परिवेश और दुनिया से अनजान व्यक्ति मूर्ख है, पर ऐसा व्यक्ति जो अपनी मूर्खता से भी अनजान है वो महामूर्ख है। इसलिए आइये हम- 
●तर्क को ज्ञान का अस्त्र बनाएं
●वैज्ञानिक सोच अपनाएँ
●संवेदनशील और न्यायप्रिय बनें।

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