09 July 2019

कहानी: काशी को बदनाम मत करो



✍🏼 नितेश शुक्ला

जबसे यह वाला थानेदार काशी की पुलिस चौकी का इंचार्ज बन कर आया था तबसे हर महीने चोरी-लूट-छेड़छाड़ व अन्य अपराधों की शिकायतें काफी कम हो गयी थीं। खुद एसपी साहब आश्चर्यचकित थे। करारी मूछों वाला यह थानेदार उनकी कल्पना से काफी ज्यादा अच्छा काम कर रहा था। लग रहा था कि काशी दुनिया के विश्वपटल पर अपना गौरव फिर से स्थापित करेगी। एसपी साहब देखना चाहते थे कि आखिर जो काम इतने थानेदार नहीं कर सके वो इस कड़ी मूछों वाले थानेदार ने कैसे कर दिखाया। उन्होंने इलाके में एक खबरी को भेजा। खबरी कुछ दिन बाजारों में टहलता रहा, कुछ दिन थाने पर तो कुछ दिन अस्सीघाट पर गुजारे, काफी कुछ देखा, लोगों की बातें सुनीं। लौटकर उसने जो कहानी एसपी साहब को सुनाई वो चौकानें वाली थी। इलाके में कड़क मूछों वाले थानेदार साहब का बड़ा रौब था। सुबह उठते ही गंगा नहाकर काशीनाथ के दर्शन करते थे। शाम को आरती का हिस्सा बनते थे। बुलेट पर अपनी तगड़ी मूछों को ताव देते हुए जब चलते थे तो काशी के राजा जैसे लगते थे। पनवाड़ी खिदमत में पान पेश करते थे तो लस्सी वाले लस्सी पीने का न्यौता देते थे। एसपी ने टोका- पर अपराध इतने कम कैसे हो गए? खबरी थोड़ा झुक गया और बोला- माफ कीजियेगा हुजूर पर इलाके में अपराध पहले से भी ज्यादा बढ़ गए हैं। हर रोज चोरी, डकैती, छेड़छाड़ होना अब आम बात हो गयी है। पर अपने थानेदार साहब में अद्भुत शक्ति है। इलाके में भद्रजन उन्हें काशी का रक्षक, बाबा विश्वनाथ का दूत आदि नामों से बुलाते हैं। उनके पास अपराधों से निपटने का बहुत अचूक अस्त्र है। दो दिन पहले काशी में दंगे हो गए पुलिस बुलाने पर भी काफी देर से आई और कई लोग मारे गए। लोगों ने पुलिस की नाकामी के खिलाफ जुलूस निकाला तब थानेदार साहब ने मंच से कहा दंगे होना दुखद है पर मेरी काशी को बदनाम मत करो। लोग घरों को लौट पड़े। आये दिन अपराध बढ़ रहे हैं। अभी परसो की बात है एक विदेशी पर्यटक पर आरती में शामिल न होने के कारण थानेदार साहब के लड़के ने हमला कर दिया। बस फिर क्या था, लोग थाने का घेराव करने लगे। अपराधी को सज़ा देने की मांग करने लगे। थानेदार साहेब बाहर आये और गरजे- विदेशी पर्यटक पर हुए हमले की वो कड़ी निंदा करते हैं पर ऐसे जुलूस निकालकर काशी को बदनाम मत करो। लोगों ने सोचा "सच बात है" और वो अपने घरों को लौट पड़े। अभी कल ही जब एक युवक को चोरी के इल्जाम में थानेदार साहब के लोगों ने पीट-पीट कर मार दिया तब भी मृतक के परिजन थाने पहुंचे, अपराधियों को गिरफ्तार करने की गुहार लगाई। मैं उनके साथ ही गया था। जाहिर सी बात है थानेदार साहब इस हत्या से बहुत दुखी हुए थे, पीड़ितों की बात सुनकर उनकी आँखों से अश्रुधारा बहने लगी। उन्होंने रुंधे गले से कहा कि इस घटना से उनके दिल को घोर आघात पहुँचा है मृतक की आत्मा को भगवान शांति दें पर आपलोग इसकी रिपोर्ट लिखवाकर और मीडिया में ले जाकर काशी को बदनाम मत करें। और इस तरह बिना रिपोर्ट लिखवाए हमको वापस लौटना पड़ा। 
एसपी साहब चकित और चिंतित नजर आ रहे थे। उन्होंने पूछा -वहाँ के पत्रकार क्या कर रहे हैं? खबरी ने बताया कि वहां के पत्रकार ऐसे हो चुके हैं कि जब थानेदार साहब भरपेट अन्न ग्रहण करके तृप्त मन से डकार भी लेते हैं तब पत्रकार तालियां बजाते हैं और कहते  हैं  "क्या उत्तम विचार हैं"।

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