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02 March 2019

सर्जिकल स्ट्राइक 2.0, भारत-पाकिस्तान : क्या सच क्या झूठ?

✍ नितेश शुक्ला ,राघवेंद्र तिवारी 

हाल ही में पुलवामा में हुए बर्बर आतंकवादी हमले के बाद 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने रात को 3 बजे जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर फाइटर जेट से बमबारी की। इस ऑपरेशन को मीडिया में सर्जिकल स्ट्राइक 2.0 बोला गया। दूसरे दिन दोनों देशों की मीडिया में काफी गरमा गरमी रही। उसके दूसरे दिन यानी 27 फरवरी को पाकिस्तान ने LOC पार करने की कोशिश की और खबर आई कि भारतीय वायुसेना ने फिर पाकिस्तान का F-16 विमान मार गिराया। भारतीय मीडिया ने "पाकिस्तान को करारा जबाब, पाक के पसीने छूटे, पाकिस्तान गिड़गिड़ाया जैसे न्यूज़ चलाये। वहीं पाकिस्तान में मीडिया कुछ और ही दावा कर रही थी। 27 फरवरी की शाम तक काफी चीजें सामने आयीं और फिर पता चला कि इस पूरे मामले पर दोनों देशों में थोक के भाव झूठ परोसा गया है। 

   दोनो देशों की जनता सच्चाई से काफी दूर है या जानबूझकर उसे रखा जा रहा है। नीचे कुछ तथ्य दिए जा रहे हैं जिसे न्यूज चैनलों, चाहे वो भारत के हों या पाकिस्तान के, ने या तो स्पष्ट रूप से सच नही दिखाया है या उसपर पर्दा डालने की कोशिश की है।

 1. पुलवामा हमले को हुए आज 14 दिन हो गए हैं पर अभी तक सरकार या  कोई एजेंसी किसी निर्णय पे नही पहुँच पाए की ये सब हुआ कैसे? जिस कश्मीर में 5 लाख से भी ज्यादा सैन्यबल तैनात हैं, खुफिया विभाग ने पहले ही अलर्ट जारी कर दिया है वहाँ 350 किलो विस्फोटक के साथ यह घटना कैसे अंजाम दी जा सकी जिसमें हमारे सैनिकों ने अपनी जानें गवाईं? 
यह अभी भी एक बड़ा प्रश्नचिन्ह बना हुआ है जिसकी मीडिया में कोई चर्चा नहीं है।

2. आतंकवाद पर कार्यवाही के नाम पर जो पिछले दो दिन से हो रहा है वो हमारे सामने है। रात के अंधेरे में सर्जिकल स्ट्राइक 2.0 हुआ। मीडिया ने यह दावा किया कि रात के अंधेरे में 300 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया गया और इसकी पुष्टि भी कर ली गयी कि 300 से ज्यादे लाशें गिरी हैं। सोशल मीडिया पर तो इन लाशों की फ़र्ज़ी फोटो भी शेयर होती रहीं। ये बात जो 26 फरवरी से लगातार चलाई जाती रही है, इसका स्रोत क्या है इसका हमको पता नहीं चल पाया। सरकार की तरफ से आये बयान में बस इतना ही कहा गया कि JEM के आतंकी कैंपो पर हवाई हमले किये गये जिसमें बड़ी संख्या में आतंकवादी मारे गए हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तान ने तो इसे शुरू में पूर्णतः खारिज कर दिया। उसने कहा कि बम खाली जगह पर गिराये गए हैं। इससे अलग अंतरराष्ट्रीय मीडिया बीबीसी न्यूज़ द्वारा बालाकोट के स्थानीय लोगों के लिए व्यक्तव्य में यह बात सामने आई कि हमले में कुछ घर छतिग्रस्त हुए हैं और एक-दो लोग घायल हुए हैं। यह लेख लिखे जाने तक अभी भी इसपर कोई पुष्टी नही की जा सकी। इसके बावजूद न्यूज एंकरों ने TV के जरिये 26 फरवरी से ही पूरे देश में ये फैलाना शुरू कर दिया कि JEM के 300 से ज्यादा आतंकी मारे गए हैं। पाकिस्तानी मीडिया और सरकार ये कहती रही कि बम खाली जगह पर गिराए गए हैं। दोनों देशों की मीडिया ने गैर जिम्मेदारी से झूठ-सच कुछ भी फैलाया और युद्ध का माहौल रचने की कोशिश की। 
Update: अभी भी इस मुद्दे पर सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट जबाब नहीं आया है। बीजेपी के एमपी एस एस अहलूवालिया कह रहे हैं कि एयर स्ट्राइक बस पाकिस्तान को चेतावनी देने के लिए था उसमें किसी की जान नहीं गयी, वहीं एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ का कहना है कि हमारा काम टारगेट को हिट करना था, हमने वो कर दिया।लाशों को गिनना हमारा काम नहीं है। अभी भी यह बात संदेह के घेरे में ही है कि क्या वास्तव में एयर स्ट्राइक से जैश के आतंकवादी मारे गए। 

2.  कश्मीर में एक भारतीय मिग-21 गिरा जिसमें 7 लोग मारे गए। इसे भारतीय मीडिया हादसा बता रहा था और बाद में कहा गया कि वो एक हेलीकॉप्टर था। जबकि पाकिस्तानी सेना और मीडिया का ये दावा था कि उन्होंने दो मिग-21 मार गिराए हैं, जिनमें एक भारतीय कश्मीर के बडगाम में गिरा है और दूसरा पाकिस्तान नियंत्रित कश्मीर में गिरा है। भारतीय मीडिया में ये बात सामने आई कि हमारा मिग कश्मीर के बड़गांव में तकनीकी खराबी से दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। बाद में बताया गया कि वो मिग-21 नहीं हेलीकॉप्टर MI-17 था। इसमें पायलट सहित सेना के 
 6 लोगों और एक नागरिक की जान गई। 

3. भारतीय मीडिया ने वायुसेना द्वारा जबाबी कार्यवाही में एक पाकिस्तानी लड़ाकू विमान F-16 मार गिराने का दावा किया, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया से ये खबर अभी भी गायब है। सरकार की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस मे ये बात रखी गयी कि पाकिस्तानी जेट विमानों ने LOC के पास से भारतीय सीमा में बमबारी की और इसकी जबाबी कार्यवाही में एक F-16 को मार गिराया गया। इस जेट को पाकिस्तानी सीमा में गिरते हुए देखा गया। 27 की शाम तक भी पाकिस्तान ने इस बात को स्वीकार नहीं किया था। 
28 को ही ये बात पता चली जब ये खबर आई कि पाकिस्तान के ग्रामीणों ने F-16 के जेट से इजेक्ट हुए पायलट को हिंदुस्तानी समझकर पीट-पीट कर अधमरा कर दिया। 

4. उधर पाकिस्तान कह रहा हमने दो लड़ाकू विमान मार गिराया है, एक विमान POK में गिरा और एक भारतीय कश्मीर में ,उसके अलावा एक भारतीय पायलट गिरफ्तार हुआ है और दो अभी भी गायब हैं।
ये खबर पहले तो हमारी मीडिया ने बताया ही नहीं। शाम 4 बजे तक तो भारतीय मीडिया इसे पाकिस्तान द्वारा फैलाया गया फेक न्यूज़ बता रहा था पर शाम को सरकार द्वारा प्रेसवार्ता के दौरान स्वीकार किया गया कि एक मिग विमान पाकिस्तान से एयर फाइट के दौरान हमनें खो दिया , और उसका पायलट मिसिंग है, उसके बाद भी भारतीय मीडिया ने इसपर उतना ज़ोर नहीं दिया।  इसको हादसा ही बताया गया और काफी युद्धोन्माद की बातें की गई। सोशल मीडिया पर और न्यूज़ रूम में दोनों देशों में युद्ध तो शुरू हो चुका था। यह युद्ध ज्यादा से ज्यादा फेक न्यूज़ फैलाने और  युद्धोन्माद फैलाने को लेकर था।

  यह बात आज समझने की जरूरत है कि युद्ध के उन्मादी झूठे देश भक्त वहाँ भी है और यहाँ भी है, संख्या कम-ज्यादा हो सकती है। शांति की बात करने वालों को वहां भी गालियाँ दी जा रहीं हैं और यहां भी। यहां तक कि पुलवामा में शहीद हुए सैनिक की विधवा पत्नी ने जब शांति की बात की तो उसको भी दो दिन तक ट्रोल किया गया, देश द्रोही कहा गया। 
     यहाँ एक महत्वपूर्ण सवाल ये है कि बिना सही जानकारी के दोनों देशों की मीडिया क्यों युद्ध को हवा देने में ज़ोर शोर से लगी हुई थी, तिल को ताड़ बनाकर क्यों पेश किया जा रहा था?  राष्टवाद के इस उन्माद को बढ़ाकर किसको फायदा पहुँचाया जा रहा था? आमतौर पर हमारी मीडिया में फेक न्यूज़ दिखता रहता है पर इस दौरान तो मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ की बाढ़ सी आ गयी थी। ये यूँ ही नहीं थी, इसका कारण क्या था?  
     अगर युद्ध के इस माहौल के पहले के दोनों देशों की हालात देखा जाय तो इसका कारण समझ में आ जायेगा कि ये युद्ध का माहौल किसके फायदे के लिए फैलाया जा रहा था। युद्ध और राष्ट्रवाद संकट में फँसे शासकवर्ग के लिए सबसे बड़ा हथियार होता है। भारत और पाकिस्तान दोनों जगहों पर सरकार के प्रति जनता का गुस्सा, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महंगाई आदि के संकट में फँसे शासक वर्ग को ऐसे माहौल की जरूरत है। उनको ये अच्छे से पता है कि ये स्थितियाँ युद्ध तक नही ले जाना है पर गर्मागर्मी का यह माहौल दोनों के लिए काफी फायदे का है।  आम जनता को यह सोचने की जरूरत है कि युद्ध से किसका फायदा है और युद्ध में मरता कौन है? क्या मरने वाला नेता ,सेलिब्रिटी ,पूंजीपति,अफसर होता है या देश के किसान ,मज़दूर का बेटा, किसी का भाई, किसी का पति, किसी का पिता? एक बात हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि युद्ध का जश्न वही मनाते है जो युद्ध नही करते और जो युद्ध करते है वो युद्ध का जश्न नही मनाते उसके दर्द को समझते है। ये भी सोचिये की कहीं आपके देशप्रेम और राष्ट्रवाद का कोई इस्तेमाल अपने वोटों के लिए तो नहीं कर रहा? एकतरफ ये पूरा घमासान चल रहा है दूसरी तरफ एक पार्टी तबातोड़ रैलियां कर रही है। आज से काफी  पहले किसी ने सच ही कहा था- 
सीमा पर तनाव है क्या?
पता करो चुनाव है क्या?

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